भारतीय सिनेमा के संजीदा अभिनेता नाना पाटेकर की शख्सियत से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन उनकी पत्नी नीलकांती पाटेकर की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। नीलकांती न केवल एक प्रतिभावान अभिनेत्री रही हैं, बल्कि उनकी शैक्षणिक योग्यता और संघर्ष की गाथा उन्हें मनोरंजन जगत की सबसे पढ़ी-लिखी और सशक्त महिलाओं की श्रेणी में खड़ा करती है। नीलकांती पाटेकर के जीवन और करियर के कुछ अनछुए पहलुओं पर एक नजर डालते हैं।
पुणे में जन्मी नीलकांती बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल थीं। उनके पिता केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग में थे, जिसके कारण उनका पालन-पोषण देश के विभिन्न हिस्सों में हुआ। विज्ञान में गहरी रुचि रखने वाली नीलकांती ने फिजिक्स में स्नातक किया। पिता की इच्छा मानकर उन्होंने IIT की कठिन प्रवेश परीक्षा दी और उसे सफलतापूर्वक पास भी कर लिया। हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था; उन्होंने इंजीनियरिंग की सुरक्षित राह चुनने के बजाय रंगमंच और कला की अनिश्चित दुनिया में कदम रखने का साहसी फैसला किया।
अभिनय के प्रति अपने जुनून को जीवित रखने के लिए नीलकांती ने शुरुआती दिनों में बैंक में नौकरी भी की। इसी दौरान मराठी थिएटर में सक्रिय रहते हुए उनकी मुलाकात नाना पाटेकर से हुई। दोनों की कला के प्रति दीवानगी ने उन्हें करीब लाया और साल 1978 में वे विवाह के बंधन में बंध गए। नीलकांती की प्रतिभा का लोहा तब माना गया जब 1973 में महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रतियोगिता में उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का स्वर्ण पदक मिला। साल 1989 में सचिन पिलगांवकर की फिल्म आत्मविश्वास के लिए उन्हें महाराष्ट्र सरकार द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से नवाजा गया।
नीलकांती और नाना पाटेकर का वैवाहिक जीवन काफी चर्चाओं में रहा। उनके पहले बेटे के असामयिक निधन ने परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया। बाद के सालों में नाना पाटेकर और मनीषा कोइराला की नजदीकियों की खबरों के बीच यह जोड़ा अलग रहने लगा। हालांकि उन्होंने कभी आधिकारिक रूप से तलाक नहीं लिया और हमेशा एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखा।
लंबे समय तक लाइमलाइट से दूर रहने के बाद नीलकांती पाटेकर हाल ही में विक्की कौशल और रश्मिका मंदाना की ऐतिहासिक फिल्म 'छावा' में नजर आईं। भले ही फिल्म में उनकी भूमिका छोटी थी, लेकिन उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने एक बार फिर साबित कर दिया कि एक सच्चा कलाकार कभी अपनी चमक नहीं खोता। वो मराठी लुक में दिखीं। इससे पहले वो साल 2016 की फिल्म 'बर्नी' में नजर आई थीं। 9 साल बाद उन्हें पर्दे पर देख फैंस उत्साहित थे। उन्होंने विक्की कौशल की दाई मां का रोल निभाया था, जिसका नाम धराऊ था।
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